Tuesday, August 9, 2022

खुद को बस ज़िंदा रखो

कल का दिन जैसे पेट में सारी तितलियां मर जाना, दर्द और इतनी तकलीफ जीवन इतना मुश्किल लग रहा था जैसे, जीना मरना बराबर ही है, ये दुनिया नर्क से कम भी नहीं है, लेकिन
वो कहते है न गमों के बदल छट जाते है और ज़िंदगी में एक नया सवेरा आता है, मेरी ज़िंदगी में भी एक नया सवेरा हुआ, मैंने लगातार चीज़ें ठीक करने का व्यवहार कायम रखा, न की भावुक होकर किसी को उल्टा सीधा सुनाया, न ही अपनी हदें पार की, जब तक चीजें अपने हक में न हो तब तक शांत रहने में बलाई है, न माफी मांगकर गिड़गिड़ाना है, न ही अहमी होकर किसी को कुछ साबित करना है, बस सबर का घूट पीकर चूपी साद लेनी है। 
शांति से अपने हक में चीज़े करो और फिर चुप चाप रह कर अपने मुताबिक चीज़े होने दो और जब सब ठीक हो जाए तभी भी शांत ही रहना है, नहीं तो यही दिन फिर से देखना पड़ सकता है, दिर्ग कालीन वाली स्तिथि का सोचो, जब भी लगे हार रहे हो, वर्तमान को ठीक करने की कोशिश करो, दोस्तों से बात करो, खुद को जिंदा रखो , यकीनन ये समय किसी मौत से कम नहीं लेकिन, अपना दुख कुछ लोगों को बताओ, ऐसे बताओ जैसे उसे बस बताओ और बस उसे सुनो सिर्फ सुनो बस, कोई नतीजे की उम्मीद न करके बस अपने दिल की बात किसी को बता दो बस, इतना भी कर लोगे तो वो दिन निकल जायेगा, वहीं शाम आने तक अपनी गलती का एहसास हो तो बात संभालने में देरी नहीं करनी चाहिए, बस एक कोशिश करो, सामने वाला जरूर तुम्हें अपना लेगा, खुद को जिंदा रखो मरने मत देना खुद को कभी, जीते जी इतने दर्द में रहना किसी मौत से कम नहीं, बस खुद को जिंदा रखो। 



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